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Yes, I am a journalist…
‘‘खींचो न कमानों को न तलवार निकालो।
जब तोप मुक़ाबिल हो तो अख़बार निकालो।।’’
-अकबर इलाहाबादी
बात लगभग 10 वर्ष पहले की है, मैं और मेरे 19 साथियों का एक बैच पत्रकारिता की पाठशाला भास्कर अकादमी भोपाल में ट्रेनिग के लिए चुना गया। क्लास का पहला दिन… देश-विदेश की पत्रकारिता के विशेषज्ञों से आमना-सामना हुआ। क्लास में प्रोजेक्टर पर हमारे लिए वेकलम था, सभी की डेस्क पर एक-एक नोटपेड और पेन रखे हुए थे, मैं माहौल देखकर भांप गया कि शायद खबरें ही लिखवाएंगे, प्रोफेसर आए और उन्होंने सबसे परिचय लिया, मेरे बैच मेें हर उम्र के साथी थे।
क्लास शुरू हुई प्रोफेसर ने एक-एक करके सबको खड़ा किया और कहा- चलकर दिखाईये… स्वभाविक था हम जैसे चलते हैं वैसे ही चलकर दिखाया गया। प्रोफेसर ने फिर कहा दूसरी तरह से चलकर दिखाईये… अब मामला कठिन होता जा रहा था, लेकिन मेरे बैच के जोशीले और यंग लडक़ों ने लेटकर, कुकडू, कान पकडक़र, लुढक़र, आड़े, तिरछे हर तरह से चलकर दिखाया यानी चलने का ही तरिका लगभग 25 तरह से निकलकर सामने आया।
कुलमिलाकर सार ये था कि जब आप 25 तरह से चल सकते हैं तो फिर एक ही खबर को 25 तरह से क्यों नहीं बना सकते? हमारे लिए उस दिन की सीख थी कि हम दूसरे अखबारों से खबरों में डिफरेंसिएटर कैसे क्रिएट कर सकते हैं। वाकई ये सीख लाजवाब थी।
खैर बात करते हैं ‘मीडिया पाइंट एंड ग्राफिक्स’ की, मुझे क्यों जरूरत पड़ी…. अकबर इलाहाबादी की दो पंक्तियां ‘खींचों न कमानों को न तलवार निकालो, जब तोप मुकाबिल हो तो अखबार निकालो’ बस इसलिए…। पत्रकारिता भी एक युद्ध लडऩे जैसा ही है, लेकिन इसमें हथियार कलम है, न की कोई तोप।
अब बात करें बैतूल की पत्रकारिता की तो मैंने जब पत्रकारिता शुरू की थी तो दो ही सबक मिले थे कि हिन्दी अच्छी होनी चाहिए और टायपिंग आना तो अनिवार्य है। आज बैतूल की पत्रकारिता किस मोड़ पर आकर खड़ी है ये देखकर खुदको पत्रकार कहने में भी शर्म आती है, जैसे पत्रकारिता नहीं कोई परचून की दुकान हो गई हो, न भाषा की समझ, न हिन्दी का ज्ञान, न पत्रकारिता का हुनर बस कार्ड बनवाया और निकल पड़े वसूली पर, कुकुरमुत्तों की तरह ऊगे पत्रकारों की भीड़ के कारण अब शायद उन पत्रकारों ने सार्वजनिक रूप से लिखना, घूमना फिरना ही छोड़ दिया है जो वास्तव में शहर की पत्रकारिता की धुरी हैं और जो आज शहर में पत्रकार घूम रहे हैं उनकी तो एक पाठशाला शुद्धलेख लिखने की लगवानी चाहिए।
ये मैं इसलिए नहीं कह रहा कि मुझे हिन्दी की समझ है, कोई भी किसी भी हुनर में कभी परिपक्व नहीं होता, बल्कि इसलिए कह रहा हूं कि यदि पत्रकारिता में ही टिकना है तो खबरों में मुट्ठा भर गलतियां करना पाप है।
मैं पत्रकारिता में स्व. जयप्रकाश चौकसे जी को महान लेखक मानता हूं, जबसे उनका स्वर्गवास हुआ है तबसे मैंने अखबारों में कॉलम पढऩे छोड़ दिए। मैं यहां मेरे आदर्श रहे गुरुदेव बिल्लौरे जी का जरूर जिक्र करूंगा, ऐसा हंसुमख इंसान जिसे देखकर नहीं लगता की पत्रकार हैं, लेकिन वाकई उनकी खबर का शीर्षक ही वो जलजला पैदा कर देता था जो अब दिखाई नहीं देता।
ऐसे ही वरिष्ठ पत्रकार, संपादक, कवि नरेंद्र सिंह अकेला हैं वे खबरों की हैडिंग में ‘और’ एवं ‘द्वारा’ शब्द का आ जाना ही पत्रकारिता में पाप करने जैसा समझते हैं और हमेशा सिखाते हैें कि हम उससे कैसे बच सकते हैं। मैं खुदको नसीब वाला मानता हूं जो मैंने ऐसे वरिष्ठ पत्रकारों के साथ काम किया है जो अनावश्यक शब्दों, फालतू की लिखावटों से खुदको दूर रखते थे। खैर अब मीडिया पाइंट एंड ग्राफिक्स सोशल न्यूज प्लेटफार्म आपके सामने हैं तो बातचीत का सिलसिला भी चलता रहेगा।
‘मीडिया पाइंट एंड ग्राफिक्स’ का उद्देश्य क्या है:-
ठेकेदारी पर जा चुकी बैतूल की पत्रकारिता में एक नया अध्याय जोडऩे का साहस है, न तो खबर की कमर तोडऩे के लिए कोई वर्जन होगा न खबर में कोई विपक्ष होगा बस सत्यपरक, सबूतों के साथ खबरों का पक्ष होगा। हमारे अधिकारी और नेता कितने जिम्मेदार हैं इसका परिचय करवाने की आवश्यकता नहीं है। जैसा टालामटोली काम है वैसी ही परंपरा खबरों को लेकर पत्रकारों से बातचीत करने की आदत में शुमार हो चुकी है।
फोन नहीं उठाना अधिकारियों का बससे बड़ा शगल है, क्योंकि यहां के अधिकारी खुद नहीं आते बल्कि किस न किसी पॉवरफुल नेता के द्वारा ही लाए जाते हैं, इसलिए वे अपने हुजूर को ही सलाम भी ठोंकते हैं और उनकी नौकरी की शुरूआत भी ‘हुकुम मेरे आका’ से होती है। खैर मीडिया पाइंट पत्रकारिता में कोई क्रांति नहीं लाना चाहता, बस खुद अपनी लाइन से न भटके इस बात के लिए भी सजग और सतर्क रहना चाहता है।
एक बात यहां स्पष्ट कर देता हूं कि मैं अखबार भी निकाल सकता था, लेकिन अब अखबार उठाने का वक्त या यूं कहें कि पढऩे का टाइम किसी के पास नहीं है, जबकि कभी अखबारों की महत्ता कम नहीं होगी। अब जब मोबाइल पर ही लोग अखबार और न्यूज पढ़ रहे हैं तो फिर अखबार के स्वरूप में ही ‘मीडिया पाइंट एंड ग्राफिक्स’ सोशल न्यूज प्लेटफार्म हमेशा आपके साथ में और हमेशा आपके हाथ में….।

2 Comments
Congratulations
बहुत खूब। ऐसे ही लिखते रहे।