आदिवासियों ने दी आंदोलन की चेतावनी
बैतूल। वन भूमि, जल-जंगल-जमीन और बुनियादी अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर जिले के अलग-अलग आदिवासी गांवों के ग्रामीणों ने वन विभाग और प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट, वनमंडल अधिकारी (उत्तर सामान्य) और पुलिस अधीक्षक कार्यालय में ज्ञापन सौंपकर वनकर्मियों पर मनमानी, झूठे शिकार प्रकरण में फंसाने की धमकी, ग्रामसभा के नाम पर अनियमितता और मूलभूत सुविधाओं की अनदे
खी के आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों ने मांगों पर शीघ्र निष्पक्ष जांच और कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
शिकार के झूठे मामले में फंसाने का आरोप
सारणी रेंज और चोपना थाना क्षेत्र के ग्राम मनकाढाना, पंचायत नूतनडंगा, तहसील घोड़ाडोंगरी के ग्रामीणों ने वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों पर उन्हें झूठे शिकार के मामले में फंसाने की साजिश का आरोप लगाया है। राजेश, राजू, रमेश, लुअरसिंग, सुखलाल और गुलनसिंग सहित ग्रामीणों ने ज्ञापन में बताया कि वे कई वर्षों से 304 तरफपाटी जंगल जमीन पर बरसाती खेती और फलदार पौधों का रोपण कर परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, वन विभाग के डिप्टी रेंजर हवनसूलाल उइके, नाकेदार शांति लाल उइके तथा चौकीदार दुकाली भसम, महेश और सुकरसिंग द्वारा उन्हें शिकार के झूठे मामले में फंसाकर जेल भेजने की धमकी दी जा रही है। ग्रामीणों ने बताया कि 25 जून 2026 को पट्टे की मांग को लेकर कलेक्टर और मुख्य वन संरक्षक को आवेदन दिया था, लेकिन शिकायत पर कोई जांच नहीं हुई। इसके बजाय उन्हें कथित रूप से झूठे प्रकरण में फंसाने और जेल भेजने की धमकी दी जा रही है। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि उन्होंने किसी वन्यजीव का शिकार नहीं किया है।
बिना सूचना प्रस्ताव पारित करने का आरोप
शाहपुर तहसील के बीजादेही थाना क्षेत्र के ग्राम काँजीतालाब, पंचायत काजली के ग्रामीणों ने वन समिति और वनकर्मियों पर बिना सूचना ग्राम स्तर पर प्रस्ताव पारित करने का आरोप लगाया है। लालजी, कोलू, बुधराम और बालाराम सहित ग्रामीणों ने दिए ज्ञापन में बताया कि 5 अगस्त 2026 को वन समिति, नाकेदार, डिप्टी साहब और गांव के कुछ लोगों द्वारा बिना पूर्व सूचना और मुनादी के प्रस्ताव पारित कर दिया गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि पर्याप्त कोरम नहीं होने के बावजूद बाद में चौकीदार के माध्यम से घर-घर जाकर लोगों के अंगूठे और हस्ताक्षर लिए गए। उन्होंने कथित प्रस्ताव को निरस्त कर नए सिरे से मुनादी कराने और विधिवत ग्रामसभा आयोजित करने की मांग की है। साथ ही आदिवासियों की कृषि भूमि पर सीपीटी निर्माण रोकने, बेदखली पर रोक लगाने, वन लाभांश की राशि सभी ग्रामीणों के खातों में समान रूप से वितरित करने तथा ग्रामसभा और संबंधित कानूनों की अनदेखी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।
गांव में स्कूल, आंगनवाड़ी, सड़क और बिजली की मांग
घोड़ाडोंगरी ब्लॉक के ग्राम दानवाखेड़ा, पंचायत रामपुर भतोड़ी के ग्रामीणों ने मूलभूत सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया है। सेकलाल, झमन सिंग, डोमरे, जागुरा, गोली और गुजर सहित ग्रामीणों ने कलेक्टर, जिला पंचायत सीईओ और महिला एवं बाल विकास अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर गांव में प्राथमिक शाला, आंगनवाड़ी केंद्र, पक्की सड़क और बिजली लाइन शुरू कराने की मांग की।
ग्रामीणों के अनुसार, तीन-चार ढालों में बसे गांव में पेयजल के लिए फिलहाल केवल एक हैंडपंप है, जिससे लोगों को परेशानी होती है। उन्होंने प्रत्येक ढाल में दो-दो हैंडपंप लगाने की मांग की है। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि वर्षों से जल-जंगल-जमीन पर काबिज रहने के बावजूद उन्हें वन अधिकार कानून के तहत पट्टे नहीं मिले हैं, जिसके कारण वे कई सरकारी योजनाओं से वंचित हैं। उन्होंने प्रति परिवार 10 एकड़ तक पट्टा आवंटित करने तथा परिवार के दो सदस्यों को रोजगार उपलब्ध कराने की मांग भी रखी है।
ग्रामीणों का कहना है कि वन अधिकार, ग्रामसभा और मूलभूत सुविधाओं से जुड़े इन मामलों पर प्रशासन द्वारा समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो वे आंदोलन को व्यापक रूप देने के लिए मजबूर होंगे।
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Editor : Anil Goyar
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