गणेश पूजन के साथ शिवपुराण प्रारंभ

बैतूल। सनातन धर्म में 4 वेद से प्रकट हुए 18 पुराण, उसी से 24 हजार श्लोक, सात संहिताएं से सजें है। शिव पुराण कथा शिव लिंग में पूरा ब्राह्मण समाया है। जलहरी पार्वती एवं लिंग (प्रतीक) शिव हैं। शिवलिंग धातु, मेवा, माखन, पत्थर, लकड़ी, लोहा एवं मिट्टी कई प्रकार के होते हैं। किन्तु नर्मदेश्वर एवं पार्थिव शिवलिंग सर्वोत्तम माने जाते हैं।
यह बात ग्राम घोघरी में सात दिवसीय शिव महापुराण कथा के प्रथम दिवस पंडित सुखदेव शर्मा ने कही। कथा का आरंभ श्री गणेश जी पूजा अर्चना के साथ हुआ। पंडित शर्मा ने कहा कि पार्वती श्रद्धा और शिव विश्वास हैं। शिव दिगम्बर हैं, इसका अर्थ उनके भीतर, बाहर कोई बनावटी या पर्दा नहीं है। शिवजी के माथे पर ज्ञान गंगा और शीतल चंद्रमा है।
वहीं हम समाधिस्त रहते हमारे माथे पर ना ज्ञान, ना शीतलता है इसलिए परेशान अधिक रहते हैं। शिव पुराण परिवार की कथा है। इसलिए रामचरित मानस में तुलसीदास जी शिव स्तुति के साथ अयोध्या कांड प्रारंभ करते हैं। अयोध्या कांड में युद्ध की तैयारी है परन्तु युद्ध नहीं है। हमारे जीवन को शिव परिवार से जोड़े, चाहे प्रदोष रहे ना रहे अपने-अपने दोष को देखे।
हमारे दोष कोई बताएगा तो हम उससे उलझ जाएगें। कथा सुनो, कथा दोष के साथ समाधान भी बताएगी और हमारे अंदर का भी क्रोध भागेगा। शीतलता, मधुरता आए ऐसी प्रार्थना के साथ कथा सुनें। कथा आयोजक शंकर साहू एवं ग्राम सरपंच श्री उईके ने सभी से कथा लाभ लेने का आग्रह किया है।
